PreePin- Historical and Technical Blog

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  • " लेटेस्ट गवर्नमैंट जॉब के बारे मे "
  • " ऐतिहासिक विषयों और ऐतिहासिक स्थानों "
  • " डिफेन्स जॉब्स के ऑनलाइन फॉर्म और ऑफलाइन फॉर्म "

Thursday, July 18, 2019

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TA new bharti | Territorial army bharti in bikaner

                                           

                             टेरीटोरियल आर्मी भर्ती फॉर फोर्थ जोन 


                   दोस्तों अगर आप को आर्मी में जाने की तमन्ना ये तो दोस्तों ये खबर आप के लिए है। दोस्तों में आप को बताना चाहुगा की टेरीटोरियल आर्मी ने फोर्थ जोन के लिए भर्ती की डेट  जारी की है दोस्तों ये भर्ती राजस्थान के बीकानेर में होने वाली है। दोस्तों ये जो भर्ती होने वाली है ये केवल ट्रेड्समैन के पदों के लिए है। ये भर्ती बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के मैदान में आयोजित करवाई जाएगी। ये भर्ती 8 sep. से 11 sep. तक होगी। दोस्तों मेने आप को पहले ही बताया है की ये भर्ती केवल ट्रेड्समेन के पदों के लिए है इसके लिए यहाँ पर 66 पोस्ट है।  इन पोस्ट के लिए आपका 10th और कुछ पोस्ट के लिए 8th पास होना जरुरी है। इन पोस्ट के लिए आपकी ऐज (उम्र) 18 से 42 साल के बिच होनी चाहिए। 

                  दोस्तों ये भर्ती रैली भर्ती है इसके लिए आप को कोई आवेदन नहीं करना पड़ेगा आप डायरेक्ट जा कर इस भर्ती को देख सकते है।  आप को वही भर्ती मैदान से ही टोकन लेना पड़ेगा उस टोकन के आधार पर आप भर्ती देख सकते है। दोस्तों अगर आप एक्स सर्विसमैन है तो आप को वहा  पर प्रॉयोरिटी दी जायगी। 

                 नोट - दोस्तों ये भर्ती रेगुलर टेरीटोरियल आर्मी की भर्ती नहीं  है। इसमें सलेक्ट होने के बाद आप को साल में दो बार ही सर्विस करने का मौका मिलेगा और सर्विस का पीरिएड (समय) लगभग 6 से लेकर 9 माह तक रहेगा और केवल सर्विस पीरिएड का ही कैंडिडेट को पैसा मिलेगा यानि सैलरी उतनी ही मिलेगी जितनी कैंडिडेट ने सर्विस की है।


                  Zone4th - राजस्थान, आंध्रप्रदेश, केरल, गुजरात, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दादर अण्ड नागर हवेली, गोवा, दमन दीव, लक्षदीप और पॉन्डिचेरी। 

                                                                      थैंक्यू। 

TA officer admit card download - Territorial Army Recruitment 2019 - Click here

यूट्यूब चैनल लिंक - PreePin




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Wednesday, July 17, 2019

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Join Indian Indian Army JAG 24th Course Online Form 2019

                  

                  Join Indian Army (Government Of India)
           JAG Law Graduate 24th Course Recruitment 2019


Same Details
  • Application Start: 16/07/2019
  • Last Date Apply Online: 14/08/2019
  • Last Date Completed Form: 14/08/2019
  • Course Start: April 2020
  • Only Apply Online Form
  • No Fee For Any Candidate

Eligibility

Bachelor Degree in Law with 55% Marks From A Recognized University
Registration In Bar Counselling

  • Age: 21- 27 Year
  • Age As on 01/01/2020
  • Height Men: 157.5 CMS
  • Height Women: 152 CMS
  • Running: 2.4 KM Run in 15 Minutes
  • Sit-Ups: 25 Non-Stop.
  • Rope Climbing: 03- 04 Meter
  • Push-Ups: 13 Non-Stop
ऑनलाइन फॉर्म अप्लाई करने के लिए Website link - Join as officer link


Join Indian Indian Army JAG का पीडीऍफ़ नोटिफिकेशन 
डाउनलोड करे-Click here


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TA officer admit card download - Territorial Army Recruitment 2019

 

Territorial Army Recruitment 2019 - Written Exam to be held on July 28



टेरिटोरियल आर्मी के ऑफिसर के रिक्त पदों के लिए एग्जाम 28 जुलाई को आयोजित होगी इस एग्जाम के अंतर्गत कुल 2 पेपर होंगे जो की दो भागो में होंगे। 
उल्लेखनीय है कि टेरिटोरियल आर्मी के ऑफिसर के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए स्नातक पास उम्मीदवारों से 25 जून तक आवेदन करना था। 
टेरिटोरियल आर्मी ऑफिसर पद 
  1. ऑनलाइन आवेदन के प्रक्रिया आरंभ होने की तिथि: 26 मई 2019
  2. ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 25 जून 2019
  3. लिखित परीक्षा के लिए तिथि: 28 जुलाई 2019

शैक्षिक योग्यता
  1. उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होनी चाहिए। 
  2. उम्मीदवार को हर तरह से शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से फिट होनी चाहिए। 
  3. आवेदन करने की तिथि को उम्र 18 से 42 वर्ष होनी चाहिए। 
  4. पद से सम्बंधित शैक्षिक योग्यता और अनुभव के विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना को देखें। निचे वेबसाइट का लिंक दिया गया है। 
       www.jointerritorialarmy.gov.in 

Note-एडमिट कार्ड आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते है इसके लिए आपको अपना ईमेल और पासवर्ड चाहिए जो की आपने फॉर्म फील करते समय दिया था। 

Download link-Click here

आप को अगर टेरीटोरियल आर्मी ज्वाइन करनी है तो आप को हमारे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब कर लेना चाहिए क्यों की हम वहा पर टेरीटोरियल आर्मी से रिलेटेड विडिओ बनाते रहते है।


Youtube Channel link-  PreePin
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Saturday, July 13, 2019

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Join Indian Army NCC Special Entry Scheme 47th Batch Course Online Form 2019

                               

                                   Join Indian Army (Government Of India

                                   NCC Special Entry 47th Batch Recruitment 2019

                                   (Only Unmarried Candidate eligible)




Application dates                          Application dates
 Start date: 10/07/2019                        Start date: 10/07/2019 
Last date: 08/08/2019                          Last date: 08/08/2019

                                          Details 

Bachelor Degree in Any Stream with 50% Marks From A Recognized University. OR It's Equivalent
Min 2 Year NCC Certificate

                                        Physical Standard & Age 

Height Men: 157.5 CM                                                          Min Age – 19 Year

Height Women: 152 CMS                                                     Max Age – 25 Year

Running: 2.4 KM Run in 15 Minutes                                 Age As on 01/01/2020

Note - 

           Training Academy: Chennai 

          Duration of training: 49 Weeks  


IMP links-      







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    Saturday, July 6, 2019

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    Gref army recruitment 2019

              

                                ग्रेफ बीआरओ ऑफलाइन फॉर्म के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी। 


                 जीआरइएफ का प्रमुख काम इंडियन आर्मी के लिए सड़के बनाना है. जीआरइएफ  इन सड़को की देखभाल भी करती है जैसे सड़के बनाने के बाद अगर सड़के टूट जाये तो सड़के रिपेयर करना और साथ ही आप जानते हे की कश्मीर में सर्दियों में सड़के जाम हो जाती हे क्यों की सड़को पर बर्फ जम जाती हे इस बर्फ को हटा कर इंडियन आर्मी के लिए रास्ता बनाना भी जीआरइएफ आर्मी का ही काम है.
                जीआरइएफ को इंडियन आर्मी की जम्‍मू एंड कश्‍मीर लाइट इंफ्रेंटी (जैकलाई) के बराबर ही दर्जा मिला हुआ है।                      अगर आपको जीआरइएफ ज्वाइन करनी हे तो आपको ये सब काम करने पड़ेगे जीआरइएफ आर्मी के फॉर्म का लिंक आपको निचे मिल जायेगा 


    निचे दिए लिंक से ग्रेफ आर्मी का फॉर्म डाउनलोड करे
                           ऑफलाइन फॉर्म।

    निचे दिए लिंक से ग्रेफ आर्मी की पोस्ट के बारे में जाने।
                         पोस्ट डिटेल्स लिंक

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    Friday, January 25, 2019

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    चौहान वंश और चौहानो की उत्पति | पृथ्वीराज चौहान एक वीर योद्धा

                   चौहानो की उत्पति के बारे में और मूल स्थान दोनों ही काफी विवादस्पद है। चारणो और चंद्रबरदाई ने चौहानो को अग्निकुल का बताया है।  और हम्मीर महाकाव्य , हम्मीर रासो और पृथ्वीराज विजय के अनुसार चौहान सूर्यवंशी थे और कुछ इतिहासकारो तो चौहनो को विदेशियों की संतान मानते है। 
             चौहान वंस के संस्थापक के बारे में कहा जाता है की उसका नाम चाहमान था उसी के नाम पर चौहान  वंस की नीव पड़ी थी। चाहमान के वश में वासुदेव नाम एक व्यक्ति था जिसने साम्भर नामक स्थान पर चौहान राज्ये को पुनः स्थापित किया और वहा पर  एक झील का भी निर्माण करवाया था जिसे आज साम्भर झील के नाम से जाना जाने लगा। ये सब बात 550 ई. के आस पास की है। चौहान वंश में एक दुर्बलराज प्रथम जिसने गौड़ प्रदेश में कई धावे बोले जिसे बहुत सा धन इकठा किया जिससे चौहान राजे और मजबूत हो सका। दुर्बलराज का बेटे का नाम गूवक था जिसको बाद में गोविन्द राज नाम से जाने जाने लगा जिसने सिंध के मुस्लिम गवर्नर को हराया था। गूवक के बाद उसके पुत्र चन्द्रराज राज और बाद में गूवक द्वितीय ने राजे किया। गूवक द्वितीय के बाद उसका पुत्र चन्दन राज ने राजे किया उसने दिल्ली के तोमर नरेश रुद्रेण को हराया और मौत के घाट उतार दिया। चन्दन राज चौहान के बाद उसका पुत्र वाक्पतिराज प्रथम ने राज किया उसके समय में साम्भर काफी शक्तिशाली था उसने महाराज की पदवी भी धारण की थी।
              वाक्पतिराज प्रथम के बाद उसका पुत्र सिंहराज सिहासन पर बैठा। सिंहराज ने महाराजधिराज की उपाधि धारण की थी। उसने प्रतिहारो से जमकर मुकाबला किया और अपने को एक स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया था। और सिंहराज ने दिल्ली के तोमरो को भी पराजित कर दिया था। सिंहराज के बाद विग्रहराज द्वितीय चौहानो का शासक बना उसने गुजरात के चालुक्य नरेश मूलराज प्रथम को पराजित किया था उसने मुस्लिम लूटेरों को भी पराजित किया था। विग्रहराज के बाद उसका छोटा भाई दुर्लबराज द्वितीय राजा बना उसने नाडौल के चौहान को पराजित किया। उसका उत्तराधिकारी गोविंदराज तृतीय उसने भी मुसलमानो से लोहा लिया उसके बाद वाक्पति द्वितीय शासक बना उसने मेवाड़ के शासक अम्बाप्रसाद को युद्ध में मार दिया था। वाक्पति के बाद वीर्यराम शासक बना वीर्यराम को नाडौल के चौहानो ने पराजित कर दिया था। उसके बाद मालवा के परमार नरेश भोज ने उसे पराजित करके मार दिया था। चामुण्डराय और सिंहघाट ने इसके बाद कुछ दिन तक राज्य किया था।  सिंहराज का उत्तराधिकारी दुर्लबराज तृतीय हुवा था बड़ा ही वीर शासक था उसने गुजरात नरेश को युद्ध में नाको चने चबवा दिए थे और वह भी एक युद्ध में मलेछो से युद्ध करता हुवा मारा गया उसके बाद उसके भाई वीर सींग और विग्रहराज तृतीय ने क्रमश: राज्ये किया था। विग्रहराज तृतीय के बाद उसका पुत्र पृथ्वीराज प्रथम जिसने 1105 ई. में राज्ये किया था उसने महाराजधिराज परमेश्वर की उपादि धारण की थी पृथ्वीराज के बाद उसका पुत्र अजयराज राजा बना वह भी एक पराक्रमी राजा था। उसने मालवा के परमार राजा नरवर्धन को हरा दिया था उसने एक बार गजनी की सेना को भी युद्ध में हरा दिया था। इसी अजयराज ने अजमेर शहर को बसाया था। उसके बाद उसका पुत्र अर्णोराज राजा बना जिसने 1133 ई. से 1155 ई. तक राज्ये किया यह अब तक का चौहानो में सबसे प्रतापी राजा था। अर्णोराज ने मुसलमानो को बुरी तरह हराया और उसने चालुक्यों को भी हराया था। परन्तु उसके बेटे जगदेव ने ही उसका वध कर दिया था।
                 जगदेव ने  अपने पिता की हत्या करके राजसिहासन प्राप्त किया था पर वह भी ज्यादा दिनों तक शासन नहीं कर पाया उसको उसके भाई विग्रहराज ने युद्ध में मौत के घाट उतार डाला। विग्रहराज चतुर्थ ने 1158 ई. से 1163 ई. तक शासन किया विग्रहराज चतुर्थ ने तोमरो को पराजित करके दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा कर लिया था और उसके बाद मुसलमानो को पराजित कर पंजाब के कुछ क्षेत्र को में समलित कर लिया था। विग्रहराज ने अपने कुल के शत्रु चालुक्यों को भी हराया था उसने कुमारपाल चालुक्य को हरा कर जालौर, पाली और नागौर को जित कर अपने राज्ये में मिला लिया था। उसने भड़ानकों को भी हराया था। विग्रहराज चतुर्थ  दुर्गो का निर्माण करवाया था। वह एक अच्छा  कवी भी था।
                      विग्रहराज के बढ़ अपर गांगेय शासक बना था परन्तु जल्दी ही उसकी मृत्यु ही गई थी। अपर गांगेय के अड़ पृथवीराज दिव्तीय शासक हुवा उसने 1169 ई. तक शासन किया था। उसने पंजाब में कई दुर्गो का निर्माण करवाया था उसने पंजाब में मुसलमानो से टक्कर ली थी। उसके मरने के बाद अर्णोराज के छोटे पुत्र सोमेश्वर राजा बना। सोमेश्वर का बचपन गुजरात में बिता था उसकी माँ कंचनदेवी चालुक्य राजा जयसिंह सिद्धराज की पुत्री थी। कुमारपाल और अर्णोराज के संबन्ध अच्छे नहीं थे परन्तु कुमारपाल ने सोमेश्वर का लालन पालन बहुत ही अच्छे से किया था। सोमेश्वर ने कुमारपाल की देख रेख में कई युद्धों में भाग लिया था जिसका अनुभव सोमेश्वर को हो गया था। सोमेश्वर का विवाह त्रिपुरी के शासक अचल की पुत्री कपूर्वी देवी से किया था।सोमेश्वर ने 1177 तक शासन किया था। सोमेश्वर के दो पुत्र थे क हरिराज और दूसरा पृथ्वीराज। ये वही पृथ्वीराज था जिसको हम पृथ्वीराज चौहान और पृथ्वीराज  तृतीये आदि नामो से जानते है। पृथ्वीराज चौहान के बारे में अगले ब्लॉग में बताऊंगा।

                                                                          प्रीतम राठौड़







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    Wednesday, December 12, 2018

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    पाबूजी राठौड़ का इतिहास | पाबूजी महाराज की फड़।

    पाबूजी राठौड़ और गौ रक्षा। 

    राव सिहाजी "मारवाड में राठौड वंश के संस्थापक " उनके तीन पुत्र थे। 
    राव आस्थानजी, राव अजेसीजी, राव सोनगजी 
    राव आस्थानजी के आठ पूत्र थे। 
    राव धुहडजी, राव धांधलजी, राव हरकडजी,राव पोहडजी, राव खिंपसिजी, राव आंचलजी,राव चाचिंगजी, राव जोपसाजी 
    राव धांधलजी राठौड़ के दो पुत्र थे।  बुढोजी और पाबुजी 
       
    pabuji maharaj rathore
    पाबूजी राठौड़ 
       श्री पाबूजी राठौङ का जन्म 1313 ई में कोळू ग्राम में हुआ था। कोळू ग्राम जोधपुर में फ़लौदी के पास है धांधलजी कोळू ग्राम के राजा थे, धांधल जी की ख्याति व नेक नामी दूर दूर तक प्रसिद्ध थी। एक दिन सुबह सवेरे धांधलजी अपने तालाब पर नहाकर भगवान सूर्य को जल तर्पण कर रहे थे। तभी वहां पर एक बहुत ही सुन्दर अप्सरा जमीन पर उतरी। राजा धांधल जी उसे देख कर उस पर मोहित हो गये, उन्होने अप्सरा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा जवाब में अप्सरा ने एक वचन मांगा कि राजन  आप जब भी मेरे कक्ष में प्रवेशकरोगे तो सुचना करके ही प्रवेश करोगे जिस दिन आप वचन तोङेगें मै उसी दिन स्वर्ग लोक लौट जाउगीं, राजा ने वचन दे दिया कुछ समय बाद धांधलजी के घर मे पाबूजी के रूप मे अप्सरा रानी के गर्भ से एक पुत्र का जन्म होता है।समय अच्छी तरह बीत रहा था, एक दिन भूल वश या कोतुहलवश धांधलजी अप्सरा रानी के कक्ष में बिना सूचित किये प्रवेश कर जाते है। तब वे देखते है कि अप्सरा रानी पाबूजी को सिंहनी के रूप मे दूध पिला रही है।  राजा को आया देख अप्सरा अपने असली रूप मे आ जाती है और राजा धांधलजी से कहती है कि "हे राजन आपने अपने वचन को तोङ दिया है इसलिये अब मै आपके इस लोक में नही रह सकती हूं। मेरे पुत्र पाबूजी कि रक्षार्थ व सहयोग हेतु मै दुबारा एक घोडी ( केशर कालमी ) के रूप में जनम लूगीं यह कह कर अप्सरा रानी अंतर्ध्यान हो जाती है ।
           समय बीत गया और पाबूजी महाराज बड़े हो गए,  गुरू समरथ भारती जी द्वारा उन्हें शस्त्रों की दीक्षा दी जाती है। धांधल जी के निधन के बाद नियमानुसार राजकाज उनके बड़े भाई बुङा जी द्वारा किया जाता है। गुजरात राज्य मे आया हुआ गाँव " अंजार " जहाँ पर देवल बाई चारण नाम की एक महिला रहती थी। उनके पास एक काले रंग की घोडी थी, जिसका नाम केसर कालमी था। उस घोडी की प्रसिद्धि दूर दूर तक फैली हुई थी। 
    उस घोडी को को जायल (नागौर) के जिन्दराव खींची ने डोरा बांधा था, और कहा कि यह घोडी मै लुंगा, यदि मेरी इच्छा के विरूद्ध तुम ने यह घोडी किसी और को दे दी तो मै तुम्हारी सभी गायों को ले जाउगां।एक रात श्री पाबूजी महाराज को स्वप्न आता है और उन्हें यह घोडी (केशर कालमी) दिखायी देती है, सुबह वो इसे लाने का विचार करते है। श्री पाबूजी महाराज अपने खास चान्दा जी, ढ़ेबाजी को साथ में लेकर अंजार के लिये रवाना होते है। अंजार पहुँच ने पर देवल बाई चारण उनकी अच्छी आव भगत करती है, और आने का प्रयोजन पूछती है।श्री पाबूजी महाराज देवल से केशर कालमी को मांगते है, लेकिन देवल उन्हें मना कर देती है, और उन्हें बताती है कि इस घोडी को जिन्दराव खींची ने डोरा बांध रखा है और मेरी गायो के अपहरण कि धमकी भी दी हुई है ।यह सुनकर श्री पाबूजी महाराज देवल बाईं चारण को वचन देते है कि तुम्हारी गायों कि रक्षा कि जिम्मेदारी आज से मेरी है, जब भी तुम विपत्ति मे मुझे पुकारोगी अपने पास ही पाओगी, उनकी बात सुनकर के देवल अपनी घोडी उन्हें दे देती है।
          श्री पाबूजी महाराज के दो बहिने थी, पेमलबाई और सोनल बाई। जिन्दराव खींची का विवाह श्री पाबूजी महाराज कि बहिन पेमल बाई के साथ होता है, और सोनल बाई का विवाह सिरोही के महाराजा सूरा देवडा के साथ होता है। जिन्दराव शादी के समय दहेज मे केशर कालमी कि मांग करता है, जिसे श्री पाबूजी महाराज के बडे भाई बूढा जी द्वारा मान लिया जाता है, लेकिन श्री पाबूजी महाराज घोडी देने से इंकार कर देते है, इस बात पर श्री पाबूजी महाराज का अपने बड़े भाई के साथ मनमुटाव हो जाता है। अमर कोट के सोढा सरदार सूरज मल जी कि पुत्री फूलवन्ती बाई का रिश्ता श्री पाबूजी महाराज के लिये आता है, जिसे श्री पाबूजी महाराज सहर्ष स्वीकार कर लेते है, तय समय पर श्री पाबूजी महाराज बारात लेकर अमरकोट के लिये प्रस्थान करते है। कहते है कि पहले ऊंट के पांच पैर होते थे इस वजह से बारात धीमे चल रही थी, जिसे देख कर श्री पाबूजी महाराज ने ऊंट के बीच वाले पैर के नीचे हथेली रख कर उसे ऊपर पेट कि तरफ धकेल दिया जिससे वह पेट मे घुस गया, आज भी ऊंट के पेट पर पांचवे पैर का निशान है। इधर देवल चारणी कि गायो को जिन्दराव खींची ले जाता है, देवल बाईं चारण काफी मिन्नते करती है लेकिन वह नही मानता है, और गायो को जबरन ले जाता है। देवल चारणी एक चिडिया का रूप धारण करके अमर कोट पहूँच जाती है, और वहाँ पर खड़ी केसर कालमी घोड़ी हिन्-हिनाने लगती है। अमर कोट में उस वक्त श्री पाबूजी महाराज की शादी में फेरो की रस्म चल रही होती है तीन फेरे ही लिए थे की चिडिया के वेश में देवल बाई चारण ने वहा रोते हुए आप बीती सुनाई ! उसकी आवाज सुनकर पाबूजी का खून खोल उठा और वे रस्म को बीच में ही छोड़ कर युद्ध के लिए प्रस्थान करते है। 
          उस दिन से राजपूतो में आधे फेरो (चार फेरों ) का रिवाज चल पड़ा है। पाबूजी महाराज अपने जीजा जिन्दराव खिंची को ललकारते है, वहा पर भयानक युद्ध होता है,  श्री पाबूजी महाराज अपने युद्ध कोशल से जिन्दराव खिंची को परस्त कर देते है, लेकिन बहिन के सुहाग को सुरक्षित रखने के लिहाज से जिन्दराव को जिन्दा छोड़ देते है । और सभी गायो को लाकर वापस देवल बाईं चारण को सोप देते है, और अपनी गायो को देख लेने को कहते है, देवल बाई चारण कहती है की एक बछडा कम है। पाबूजी महाराज वापस जाकर उस बछड़े को भी लाकर दे देते है। श्री पाबूजी महाराज रात को अपने गाँव गुन्जवा में विश्राम करते है तभी रात को जिन्दराव खींची अपने मामा फूल दे भाटी के साथ मिल कर सोते हुए पर हमला करता है।  जिन्दराव के साथ पाबूजी महाराज का युद्ध चल रहा होता है और उनके पीछे से फूल दे भाटी वार करता है, और इस प्रकार श्री पाबूजी महाराज गायो की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे देते है ।
           पाबूजी महाराज की रानी फूलवंती जी, व बूढा जी की रानी गहलोतनी जी व अन्य राजपूत सरदारों की राणियां अपने अपने पति के साथ सती हो जाती है, कहते है की बूढाजी की रानी गहलोतनी जी गर्भ से होती है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गर्भवती स्त्री सती नहीं हो सकती है  इस लिए उन्होंने अपना पेट कटार से काट कर पेट से बच्चे को निकाल कर अपनी सास को सोंप कर कहती है की यह बड़ा होकर अपने पिता व चाचा का बदला जिन्दराव से जरूर लेगा, यह कह कर वह सती हो जाती है। कालान्तर में वह बच्चा झरडा जी ( रूपनाथ जो की गुरू गोरखनाथ जी के चेले होते है ) के रूप में प्रसिद्ध होते है तथा अपनी भुवा की मदद से अपने फूफा को मार कर बदला लेते है और जंगल में तपस्या के लिए निकल जाते है।
                                 जय माता जी की
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