Friday, July 20, 2018

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बीकानेर का राठौड़ वंश – संक्षिप्त इतिहास

संस्थापक

राव बीका (जोधा का पांचवां पुत्र)

1465 ई. में जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के पांचवे पुत्र बीका ने बीकानेर के राठौड़ वंश की नीव रखी।
1488 ई. में राती घाटी नामक स्थान पर बीकानेर की स्थापना कर उसे अपनी राजधानी बनाया।
राव बीका के पश्चात् लूणकरण शासक बना अत्यधिक दानी प्रवृति का होने के कारण उसे कलियुग का कर्ण भी कहा जाता है। इसने लूण-करणसर की स्थापना की।
लूणकरण के पश्चात् राव जैतसी बीकानेर का शासक था। जैतसी के पुत्र कल्याणमल ने पहले शेरशाह सूरी की अधिनता स्वीकार की ।

रायसिंह राठौड़ (1574-1612 ई.)

जन्म – 20 जुलाई 1541 ई. में, 1574 ई. बीकानेर का शासक बना। अकबर व जहांगीर की सेवा की। 1572 ई. में अकबर ने रायसिंह को मारवाड़ का गर्वनर नियुक्त किया।
कठौली की लडाई- 1573 ई. में गुजरात के इब्राहिम हुसैन मिर्जा को शाही सेना के नेतृत्व में रायसिंह ने कठौती नामक स्थान पर पराजित किया।
सम्राट अकबर ने रायसिंह के नेतृत्व में 1574 ई. में सिवाणा गढ़ पर अधिकार करने हेतु भेजा। अकबर ने इसे 4000 का मनसबदार बनाया। जहांगीर के शासनकाल में 5000 की मनसबदारी मिली।
अकबर व जहांगीर की तरफ से जूनागढ़ सोरठ, नागौर, श्शमशाबाद, आदि जागीरें रायसिंह को मिली रायसिंह की वतन जागीर में 47 परगने थे। जहांगीर का रायसिंह में अत्यधिक विश्वास था। 1606 ई. में जहांगीर युद्ध के लिए राजधानी आगरा से बाहर गया तब आगरा की रक्षा के लिए रायसिंह को वहां नियुक्त किया।
मुंशी देवी प्रसाद ने रायसिंह को राजपुताने का कर्ण कहा है।
कर्मचंद की देखरेख में 1589-94 ई. जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया
रायसिंह प्रशक्ति उत्कीर्ण करवाई।
कर्मचंद वेषोत्कीर्तनकं काब्य में रायसिंह को “राजेन्द्र”कहा गया है।
1612 ई. बुहारनपुर में मृत्यु।
पृथ्वीसिंह राठौड़ अकबर का दरबारीकवि। अकबर ने इसे गागरोण (झालावाड़) का दुर्ग उपहारस्वरूप दिया। पृथ्वीराज राठौड ने “डिंगल शैली में बैली किशन रूकमणी री” ग्रन्थ की रचना की। इसका विवाह राणा प्रताप की भतीजी किरण देवी से हुआ।
मतीरे की राड़ 1644 ई.
कर्णसिंह -अमरसिंह         अमरसिंह की विजय    (बीकानेर )V(नागौर)
17 वीं सदी में बीकानेर के शासक कर्णसिंह ने बीकानेर से 25 कि.मी. दूर देश्नोक नामक स्थान पर करणीमाता का मंदिर बनवाया। -बीकानेर के राठौडो की कुल देवी -करणी माता।
बीकानेर के शासक अनूपसिंह के समय बीकानेर की चित्रकला व साहित्य का सर्वाधिक विकास हुआ।
अनूपसिंह – अनूपविवेक
इसी के समय आनन्दराव ने गीता का राजस्थानी भाषा में अनुवाद किया।
बीकानेर के शासक सूरतसिंह ने सूरतगढ़ की स्थापना करवाई।
इन्होंने 19 वीं सदी आरम्भ में भटनेर दुर्ग पर अधिकार किया। उस दिन मंगलवार का दिन था परिणामस्वरूप भटनेर का नाम हनुमानजी के नाम पर हनुमानगढ़ कर दिया।

गंगासिंह राठौड़ – (1887-1943 )

56 वर्ष का शासन, पिता का नाम – लाल सिंह
गंगासिंह ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अपनी ऊंटो की सेना गंगा रिसाला चीन भेजी। इन्हे चीनी पदक से सम्मानित किया गया।
26 अक्टूबर 1927 को गंगानहर का उद्घाटन वायसराय इरविन द्वारा किया गया। इसी दिन से गंगानगर की स्थापना मानी जाती है। गंगासिंह को आधुनिक भारत का भागीरथ माना जाता है। इन्होने लंदन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया। 1921 में नरेन्द्र मण्डल (चेम्बर आॅफ प्रिंसेज) के प्रथम चासलर गंगासिंह बनाये गये।
गंगासिंह के प्रतिरोध के कारण बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना कोलकत्ता में हुई। वर्ष 1943 में इनकी मृत्यु हो गयी। राजस्थान के एकीकरण के समय बीकानेर के शासक सार्दलसिंह थे।
क्रम संनाम शासक राजाकब से कब तकशासन अवधि
1राव बीका संस्थापक1465-150439 वर्ष
2राव नेरी1504-15054 माह
3राव लूणकरण1505-152621 वर्ष
4राव जैतसी1526-154215 वर्ष 8 माह
5राव कल्याण1542-157129 वर्ष
6राव रायसिंह1571-161240वर्ष 9 माह
7राजा दलपतसिंह1612-16141 वर्ष 10 माह
8राजा सूरसिंह1614-163117 वर्ष 10 माह
9राजा कारन सिंह1631-166937 वर्ष 8 माह
10महाराजा अनूपसिंह1669-169828 वर्ष 10 माह
11महाराजा सरूपसिंह1698-17002 वर्ष 6 माह
12महाराजा सुजानसिंह1700-173636 वर्ष 1 माह
13महाराजा जोरावरसिंह1736-17459 वर्ष 1 माह
14महाराजा गज सिंह1745-178741 वर्ष 6 माह
15महाराजा राज सिंह1787-178721 दिन
16महाराजा प्रतापसिंह1787-17874 माह
17महाराजा सूरतसिंह1787-182841 वर्ष 9 माह
18महाराजा रतनसिंह1828-185123 वर्ष 4 माह
19महाराजा सरदारसिंह1851-187220 वर्ष 9 माह
20महाराजा डूंगर सिंह1872-188715 वर्ष 1 माह
21महाराजा गंगा सिंह1887-194355 वर्ष 5 माह
22महाराजा सार्दूलसिंह1943-19507 वर्ष 10 माह

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