Friday, January 25, 2019

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चौहान वंश और चौहानो की उत्पति | पृथ्वीराज चौहान एक वीर योद्धा

               चौहानो की उत्पति के बारे में और मूल स्थान दोनों ही काफी विवादस्पद है। चारणो और चंद्रबरदाई ने चौहानो को अग्निकुल का बताया है।  और हम्मीर महाकाव्य , हम्मीर रासो और पृथ्वीराज विजय के अनुसार चौहान सूर्यवंशी थे और कुछ इतिहासकारो तो चौहनो को विदेशियों की संतान मानते है। 
         चौहान वंस के संस्थापक के बारे में कहा जाता है की उसका नाम चाहमान था उसी के नाम पर चौहान  वंस की नीव पड़ी थी। चाहमान के वश में वासुदेव नाम एक व्यक्ति था जिसने साम्भर नामक स्थान पर चौहान राज्ये को पुनः स्थापित किया और वहा पर  एक झील का भी निर्माण करवाया था जिसे आज साम्भर झील के नाम से जाना जाने लगा। ये सब बात 550 ई. के आस पास की है। चौहान वंश में एक दुर्बलराज प्रथम जिसने गौड़ प्रदेश में कई धावे बोले जिसे बहुत सा धन इकठा किया जिससे चौहान राजे और मजबूत हो सका। दुर्बलराज का बेटे का नाम गूवक था जिसको बाद में गोविन्द राज नाम से जाने जाने लगा जिसने सिंध के मुस्लिम गवर्नर को हराया था। गूवक के बाद उसके पुत्र चन्द्रराज राज और बाद में गूवक द्वितीय ने राजे किया। गूवक द्वितीय के बाद उसका पुत्र चन्दन राज ने राजे किया उसने दिल्ली के तोमर नरेश रुद्रेण को हराया और मौत के घाट उतार दिया। चन्दन राज चौहान के बाद उसका पुत्र वाक्पतिराज प्रथम ने राज किया उसके समय में साम्भर काफी शक्तिशाली था उसने महाराज की पदवी भी धारण की थी।
          वाक्पतिराज प्रथम के बाद उसका पुत्र सिंहराज सिहासन पर बैठा। सिंहराज ने महाराजधिराज की उपाधि धारण की थी। उसने प्रतिहारो से जमकर मुकाबला किया और अपने को एक स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया था। और सिंहराज ने दिल्ली के तोमरो को भी पराजित कर दिया था। सिंहराज के बाद विग्रहराज द्वितीय चौहानो का शासक बना उसने गुजरात के चालुक्य नरेश मूलराज प्रथम को पराजित किया था उसने मुस्लिम लूटेरों को भी पराजित किया था। विग्रहराज के बाद उसका छोटा भाई दुर्लबराज द्वितीय राजा बना उसने नाडौल के चौहान को पराजित किया। उसका उत्तराधिकारी गोविंदराज तृतीय उसने भी मुसलमानो से लोहा लिया उसके बाद वाक्पति द्वितीय शासक बना उसने मेवाड़ के शासक अम्बाप्रसाद को युद्ध में मार दिया था। वाक्पति के बाद वीर्यराम शासक बना वीर्यराम को नाडौल के चौहानो ने पराजित कर दिया था। उसके बाद मालवा के परमार नरेश भोज ने उसे पराजित करके मार दिया था। चामुण्डराय और सिंहघाट ने इसके बाद कुछ दिन तक राज्य किया था।  सिंहराज का उत्तराधिकारी दुर्लबराज तृतीय हुवा था बड़ा ही वीर शासक था उसने गुजरात नरेश को युद्ध में नाको चने चबवा दिए थे और वह भी एक युद्ध में मलेछो से युद्ध करता हुवा मारा गया उसके बाद उसके भाई वीर सींग और विग्रहराज तृतीय ने क्रमश: राज्ये किया था। विग्रहराज तृतीय के बाद उसका पुत्र पृथ्वीराज प्रथम जिसने 1105 ई. में राज्ये किया था उसने महाराजधिराज परमेश्वर की उपादि धारण की थी पृथ्वीराज के बाद उसका पुत्र अजयराज राजा बना वह भी एक पराक्रमी राजा था। उसने मालवा के परमार राजा नरवर्धन को हरा दिया था उसने एक बार गजनी की सेना को भी युद्ध में हरा दिया था। इसी अजयराज ने अजमेर शहर को बसाया था। उसके बाद उसका पुत्र अर्णोराज राजा बना जिसने 1133 ई. से 1155 ई. तक राज्ये किया यह अब तक का चौहानो में सबसे प्रतापी राजा था। अर्णोराज ने मुसलमानो को बुरी तरह हराया और उसने चालुक्यों को भी हराया था। परन्तु उसके बेटे जगदेव ने ही उसका वध कर दिया था।
             जगदेव ने  अपने पिता की हत्या करके राजसिहासन प्राप्त किया था पर वह भी ज्यादा दिनों तक शासन नहीं कर पाया उसको उसके भाई विग्रहराज ने युद्ध में मौत के घाट उतार डाला। विग्रहराज चतुर्थ ने 1158 ई. से 1163 ई. तक शासन किया विग्रहराज चतुर्थ ने तोमरो को पराजित करके दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा कर लिया था और उसके बाद मुसलमानो को पराजित कर पंजाब के कुछ क्षेत्र को में समलित कर लिया था। विग्रहराज ने अपने कुल के शत्रु चालुक्यों को भी हराया था उसने कुमारपाल चालुक्य को हरा कर जालौर, पाली और नागौर को जित कर अपने राज्ये में मिला लिया था। उसने भड़ानकों को भी हराया था। विग्रहराज चतुर्थ  दुर्गो का निर्माण करवाया था। वह एक अच्छा  कवी भी था।
                  विग्रहराज के बढ़ अपर गांगेय शासक बना था परन्तु जल्दी ही उसकी मृत्यु ही गई थी। अपर गांगेय के अड़ पृथवीराज दिव्तीय शासक हुवा उसने 1169 ई. तक शासन किया था। उसने पंजाब में कई दुर्गो का निर्माण करवाया था उसने पंजाब में मुसलमानो से टक्कर ली थी। उसके मरने के बाद अर्णोराज के छोटे पुत्र सोमेश्वर राजा बना। सोमेश्वर का बचपन गुजरात में बिता था उसकी माँ कंचनदेवी चालुक्य राजा जयसिंह सिद्धराज की पुत्री थी। कुमारपाल और अर्णोराज के संबन्ध अच्छे नहीं थे परन्तु कुमारपाल ने सोमेश्वर का लालन पालन बहुत ही अच्छे से किया था। सोमेश्वर ने कुमारपाल की देख रेख में कई युद्धों में भाग लिया था जिसका अनुभव सोमेश्वर को हो गया था। सोमेश्वर का विवाह त्रिपुरी के शासक अचल की पुत्री कपूर्वी देवी से किया था।सोमेश्वर ने 1177 तक शासन किया था। सोमेश्वर के दो पुत्र थे क हरिराज और दूसरा पृथ्वीराज। ये वही पृथ्वीराज था जिसको हम पृथ्वीराज चौहान और पृथ्वीराज  तृतीये आदि नामो से जानते है। पृथ्वीराज चौहान के बारे में अगले ब्लॉग में बताऊंगा।

                                                                      प्रीतम राठौड़







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